वकील के फर्जी हस्ताक्षर की FSL जाँच के आदेश -इलाहाबाद हाईकोर्ट


इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फतेह मेमोरियल इंटर कॉलेज, कुशीनगर के प्रबंधन समिति चुनाव को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में वकील की पहचान और दस्तावेजों पर हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच का आदेश दिया। याचिकाकर्ता संगीता गुप्ता ने 2023 के चुनाव को चुनौती दी थी। आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र और मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली की खंडपीठ ने दिया।

➡️ FSL जाँच क्या है:-

एफएसएल जांच का मतलब फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच से है, जिसमें किसी अपराध से संबंधित भौतिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है। यह एक सरकारी प्रयोगशाला है जो खून, बाल, डीएनए, उंगलियों के निशान, हस्तलेख, दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे सबूतों की जांच करके अदालत में पेश किए जाने वाले वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान करती है। इस जांच से अपराध की सच्चाई, अपराधी की पहचान, मृत्यु का कारण और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का पता लगाने में मदद मिलती है। 

➡️ एफएसएल जांच के मुख्य बिंदु:

✒️ उद्देश्य: अपराध की जांच में वैज्ञानिक आधार प्रदान करना, अपराधी की पहचान करने और अपराध के कारणों का पता लगाने में मदद करना।

✒️ जांच के क्षेत्र: एफएसएल में कई विशेषज्ञ होते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में जांच करते हैं, जिनमें शामिल हैं:

✒️ फॉरेंसिक बायोलॉजी: डीएनए, रक्त और बाल जैसे जैविक साक्ष्यों का विश्लेषण।

✒️ फॉरेंसिक केमिस्ट्री: दवाओं, रसायनों और विस्फोटकों की जांच।

✒️ फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी: जहर और ड्रग्स का विश्लेषण।

✒️ डिजिटल फॉरेंसिक: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और साइबर अपराधों की जांच।

✒️ फॉरेंसिक डॉक्यूमेंट्स: हस्तलेख, हस्ताक्षर, और जाली दस्तावेजों की जांच।

✒️ साक्ष्य: घटनास्थल से एकत्र किए गए विभिन्न भौतिक साक्ष्यों का परीक्षण किया जाता है, जैसे खून के धब्बे, बाल, कपड़े, जूते के निशान और उंगलियों के निशान।

 इस प्रकार एफएसएल जांच की रिपोर्ट को अदालत में एक महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर पेश किया जाता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को एक ठोस आधार मिलता है।

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली )

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