केवल अनुबन्ध नहीं है हिन्दू विवाह, नोटरी मह्त्वहीन - मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

 


मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि 

हिंदू विवाह को न तो केवल नोटरी कृत समझौते के आधार पर संपन्न माना जा सकता है और न ही ऐसे समझौते के जरिए वैध रूप से समाप्त किया जा सकता है। हिंदू कानून के तहत विवाह कोई अनुबंध नहीं है, इसलिए केवल नोटरीकृत विवाह समझौते से वैध विवाह नहीं माना जाएगा। 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह कोई कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) नहीं, बल्कि एक अटूट संस्कार है। इसलिए, केवल स्टाम्प पेपर पर नोटरी द्वारा प्रमाणित (Notarized) अनुबंध के जरिए न तो कोई हिंदू विवाह वैध माना जा सकता है और न ही उसे कानूनी रूप से समाप्त (तलाक) किया जा सकता है।

⚫ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण निर्णय (जहाँ अदालत ने कहा था कि हिंदू विवाह कोई अनुबंध नहीं है और नोटरी द्वारा तलाक या विवाह वैध नहीं है) में मुख्य याचिकाकर्ता राम कृपाल सिंह थे और प्रतिवादी मध्य प्रदेश राज्य (राज्य सरकार) थी |

➡️ मूल तथ्य और पक्षकार (Parties) इस प्रकार हैं:

अपीलकर्ता /याचिकाकर्ता: राम कृपाल सिंह (इन्होंने deceased/मृतक महिला सुमन बाई के पति होने का दावा किया था)

प्रतिवादी: मध्य प्रदेश राज्य, मूल मृतक कर्मचारी: दिवंगत सुमन बाई (जनजातीय एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में स्थायी कर्मचारी)पहले पति: कोक सिंह (सुमन बाई के पहले और कानूनी पति, जिनके साथ कोई तलाक नहीं हुआ था)

     यह पूरा विवाद एक सरकारी कर्मचारी (सुमन बाई) की मृत्यु के बाद मिलने वाले पारिवारिक पेंशन और अन्य लाभों को प्राप्त करने से जुड़ा था।

➡️ निर्णय से जुड़ी मुख्य डिटेल्स इस प्रकार हैं:

मामले की पृष्ठभूमि: यह फैसला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (ग्वालियर खंडपीठ) की जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ द्वारा एक मृत महिला सरकारी कर्मचारी के पारिवारिक लाभों (पेंशन) के विवाद पर सुनवाई के दौरान दिया गया था।

निजी समझौते से तलाक अमान्य: मृत महिला कर्मचारी (सुमन बाई) ने अपने पहले पति को बिना तलाक दिए, एक नोटरीकृत समझौते के जरिए अलग रहने का करार किया था और दूसरे व्यक्ति (राम कृपाल) के साथ नोटरीकृत विवाह अनुबंध कर लिया था।

अदालत की व्यवस्था: अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू कानून के तहत, विवाह को मात्र नोटरी द्वारा सत्यापित समझौते से तोड़ा नहीं जा सकता। इसके लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) की धारा 13 के तहत सक्षम पारिवारिक न्यायालय (Family Court) का दरवाजा खटखटाकर कानूनी डिक्री (Court Decree) प्राप्त करना अनिवार्य है।

नोटरी का कार्यक्षेत्र: हाईकोर्ट ने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि नोटरी अधिकारी को शादी कराने या तलाक के कागजात प्रमाणित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

निष्कर्ष:

⚫ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अनुसार, हिंदू विवाह न तो नोटरीकृत अनुबंध से संपन्न होता है और न ही ऐसे किसी अनुबंध से समाप्त होता है। विवाह के लिए अनिवार्य धार्मिक रीतियां (जैसे सप्तपदी या सात फेरे) पूरी होनी चाहिए और तलाक के लिए कोर्ट की डिक्री अनिवार्य है। नोटरी द्वारा किए गए ऐसे कथित विवाह या तलाक पूरी तरह से गैर-कानूनी और महत्वहीन हैं।

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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