12 वर्ष बाद अनुकम्पा नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती-इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि
यदि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) देते समय विभाग को आवेदक के पिता की सरकारी नौकरी की जानकारी थी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद नियुक्ति दी गई थी, तो लगभग 12 वर्ष बाद यह कहते हुए सेवा समाप्त नहीं की जा सकती कि आवेदक ने तथ्य छिपाए थे।
इस प्रकार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 12 साल पहले मां की मृत्यु के बाद मिली अनुकंपा नियुक्ति को इस आधार पर नहीं छीना जा सकता कि पिता की सरकारी नौकरी की जानकारी छिपाई गई थी, क्योंकि विभाग को नियुक्ति के समय ही यह तथ्य पता था।
⚫ निर्णय के पक्षकार (Parties)
याचिकाकर्ता: उपासना अग्रवाल (वरिष्ठ लिपिक पद पर कार्यरत कर्मचारी)
विपक्ष/प्रतिवादी: उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य संबंधित जिला अधिकारी/जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
मामले का विवरण
नियुक्ति का वर्ष: याचिकाकर्ता को करीब 12 वर्ष पूर्व अपनी माता की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई थी।सेवा समाप्ति का आदेश: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 11 अगस्त 2025 को एक शिकायत के आधार पर याचिकाकर्ता की सेवा यह कहते हुए समाप्त कर दी गई कि उसने पिता की सरकारी सेवा की जानकारी छिपाई थी।
अदालत का फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया।
मुख्य आधार: अदालत ने पाया कि मूल संस्तुति और दस्तावेजों में पहले से ही दर्ज था कि पिता सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विभाग को शुरुआत से ही इसकी जानकारी थी और सत्यापन के बाद ही नियुक्ति दी गई थी। 12 साल बाद विभाग अपनी ही लापरवाही या आधारहीन शिकायतों का लाभ उठाकर कर्मचारी की नौकरी नहीं छीन सकता, खासकर बिना किसी उचित विभागीय जांच के।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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