लव जिहाद में भी भरण पोषण-मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

 


मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह करने और बाद में उत्पीड़न से जुड़े एक 'लव जिहाद' मामले में जून 2026 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। 

इस प्रकरण में शामिल मुख्य पक्षों के नाम निम्नलिखित हैं:

याचिकाकर्ता (पीड़िता/पत्नी): एक हिंदू महिला

प्रतिवादी (पति): मुस्तफा बोहरा उर्फ गब्बर (बोहरा मुस्लिम समुदाय)

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर बेंच) के इस मामले में पीड़ित महिला (पत्नी) और उनकी नाबालिग बेटी याचिकाकर्ता (याचिकाकर्ता 1 और 2) हैं, और महिला के पति (एक मुस्लिम व्यक्ति जो हिंदू बनकर रहा था) इस मामले में प्रतिवादी (Respondent) हैं। अदालत की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कानूनी दस्तावेजों में उनका नाम गुप्त रखा गया है।

मामले से जुड़े मुख्य पक्ष और तथ्य:

याचिकाकर्ता (पीड़िता और उसकी बेटी): पत्नी ने आरोप लगाया था कि 23 फरवरी 2020 को कोरोना लॉकडाउन के दौरान एक मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया था। पति ने खुद को हिंदू बताया था। बाद में गर्भावस्था के दौरान महिला को पता चला कि उसका पति एक मुस्लिम व्यक्ति था (कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उसका नाम 'गब्बर उर्फ मुस्तफा बोहरा' बताया गया है)। सच्चाई सामने आने पर उसके साथ मारपीट की गई, धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और प्रताड़ित किया गया|

प्रतिवादी (पति): पति पर धार्मिक पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने, अपहरण का प्रयास करने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। 

हाईकोर्ट द्वारा नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रतिवादी (पति) अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि केवल इस आधार पर कि विवाह कानूनी रूप से अमान्य था, पत्नी और बच्ची को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसा करना पीड़ित महिला का "आगे और उत्पीड़न" (Further Victimization) करने के समान है। अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी को ₹10,000 प्रति माह और नाबालिग बेटी के लिए पहले से निर्धारित ₹2,000 को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह दे, अर्थात कुल ₹20,000 प्रति माह गुजारा भत्ता चुकाए।

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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