बंदरों के आतंक और मानव बन्दर संघर्ष पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बंदरों के बढ़ते आतंक और मानव-बंदर संघर्ष पर सख्त रुख अपनाते हुए हाल ही में राज्य सरकार द्वारा गठित 13 सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी को केवल कागजों तक सीमित न रहकर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।अदालत ने कहा कि समिति नियमित बैठकें करें और सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे.
➡️ कोर्ट के मुख्य निर्देश और अपडेट
⚫ मुख्य पक्षकार (Parties Involved)
⚫ याचिकाकर्ता (Petitioners):
विनीत शर्मा और प्रजाक्ता सिंहल, जिनकी ओर से वकील पवन कुमार तिवारी और आकाश वशिष्ठ पैरवी कर रहे हैं।
⚫ प्रतिवादी/विपक्षी (Respondents):
उत्तर प्रदेश सरकार (अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल), नगर निकाय, वन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारी।
⚫ कमेटी की सक्रियता:
अदालत ने स्पष्ट किया कि 15 जुलाई 2026 को गठित 13 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति नियमित बैठकें करे और याचिकाकर्ताओं द्वारा सुझाई गई कार्ययोजना पर जल्द से जल्द ठोस निर्णय ले।
⚫ कार्रवाई रिपोर्ट तलब:
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई पर समिति की बैठकों की कार्यवाही (मिनट्स) और अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट अदालत में पेश करे।
⚫ वन विभाग और स्थानीय निकाय:
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों से बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने का काम लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
⚫ वैज्ञानिक अध्ययन:
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) को इस समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक रिपोर्ट के साथ-साथ एक अल्पकालिक रणनीति तैयार करने में तेजी लाने को कहा गया है।
⚫ अगली सुनवाई:
इस जनहित याचिका पर मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को तय की गई है।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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