सुप्रीम कोर्ट वकीलों से वर्चुअल माध्यम अपनाने की केवल अपील कर सकती है-सुप्रीम कोर्ट

 सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह वकीलों को केवल वर्चुअल (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) माध्यम से सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

अदालत ने कहा कि 

वह केवल बार के सदस्यों से अपील कर सकती है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा हुए ईंधन संकट को देखते हुए अधिक से अधिक वर्चुअल माध्यम अपनाएं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा,

“ याचिकाकर्ता की पहल की सराहना करते हैं। लेकिन यह उचित नहीं होगा कि सदस्यों की कठिनाइयों को जाने बिना उन्हें ऑनलाइन उपस्थित होने का न्यायिक आदेश दिया जाए। इसलिए हम कोई निर्देश जारी नहीं कर रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर बार के सदस्यों से वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की गंभीर अपील करते हैं।”

चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि 

अदालत वर्चुअल सुनवाई के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं देने को तैयार है लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बना सकती।

उन्होंने कहा,

यह अदालत का आदेश नहीं है। हमने केवल प्रशासनिक परिपत्र जारी कर बार के सदस्यों से घर से वर्चुअल माध्यम से जुड़ने का अनुरोध किया है। लेकिन हम ऐसा प्रतिबंध लागू नहीं कर सकते।”

 कोर्ट ने यह भी कहा कि

 वकीलों के लिए व्यक्तिगत (फिजिकल) रूप से पेश होने का विकल्प हमेशा खुला रहना चाहिए, हालांकि अत्यधिक गर्मी और ईंधन संरक्षण को देखते हुए ऑनलाइन सुनवाई को प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

 ➡️ मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी और घटनाचक्र :

⚫ पीठ: यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ द्वारा की गई।

मामला: अदालत ने यह व्यवस्था एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न ईंधन संकट और बढ़ते प्रदूषण/गर्मी को देखते हुए दिल्ली के सभी कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को तीन महीने के लिए अनिवार्य रूप से वर्चुअल मोड में शिफ्ट कर दिया जाना चाहिए।

अदालत का रुख:

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की पहल की सराहना की, लेकिन न्यायिक आदेश के जरिए वकीलों को केवल वर्चुअल मोड में पेश होने के लिए मजबूर करने से इनकार कर दिया।

सीजेआई ने कहा कि 

वे प्रशासनिक स्तर पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और वकीलों से ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प चुनने की अपील कर सकते हैं, लेकिन इसे किसी भी वकील पर थोपा नहीं जा सकता।

यह वकीलों की व्यावहारिक कठिनाइयों और व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत पर निर्भर करता है।

वर्चुअल सुनवाई पर वर्तमान स्थिति:

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने ईंधन की बचत के लिए सोमवार और शुक्रवार को मामलों की सुनवाई विशेष रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए करने की पहल की थी।

हालांकि, वकीलों के संगठनों के विरोध और व्यावहारिक दिक्कतों के बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो वकील किन्हीं कारणों से व्यक्तिगत रूप से पेश होना चाहते हैं, वे अदालतों में आकर बहस कर सकते हैं

लाइवलॉ (LiveLaw) की रिपोर्ट के अनुसार, 

कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वकीलों की भौतिक उपस्थिति (Physical appearance) उनके अधिकारों में शामिल है और इसे पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता।

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट

कैराना (शामली) 

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