ई-रिक्शा चालकों के लिए भी है कानून

   


  वर्तमान में ई-रिक्शा नगरीय हो या ग्रामीण क्षेत्र, परिवहन के मुख्य साधन के रूप में प्रयोग की जा रही हैं. जिसके चालक यात्रियों की परेशानी को देखते हुए उनसे मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं. जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत ई-रिक्शा के लिए अधिकतम किराया 8.30 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया है। इसके साथ ही यह भी जान लें कि यह नियम मुख्य रूप से पूरी यात्रा (आरक्षित/बुक) के लिए लागू होता है। 

➡️ यूपी में ई-रिक्शा किराए से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

पूरी गाड़ी बुक करने पर: राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, यदि आप ई-रिक्शा को व्यक्तिगत रूप से पूरी यात्रा के लिए बुक करते हैं, तो ड्राइवर आपसे 8.30 रुपये प्रति किलोमीटर से अधिक नहीं वसूल सकता।

प्रति सवारी (शेयरिंग) व्यवस्था: सामान्य तौर पर जो ई-रिक्शा जगह-जगह सवारियां बैठाकर चलते हैं, उनका किराया स्थानीय परिवहन अधिकारियों और जिला प्रशासन द्वारा तय किया जाता है। अलग-अलग शहरों (जैसे लखनऊ, नोएडा) में यह आमतौर पर दूरी के हिसाब से 10 से 20 रुपये प्रति सवारी के बीच होता है।

स्थानीय नियम: किराये और संचालन को लेकर सख्त नियमों के तहत ई-रिक्शा का संचालन केवल चिन्हित मार्गों पर ही किया जाना अनिवार्य है।

ड्राइवर का खुद का रिक्शा होना: नए नियमों के तहत ई-रिक्शा माफिया (किराये पर गाड़ी चलाने वाले) पर अंकुश लगाने के लिए, ई-रिक्शा का मालिक होना और उसे स्वयं चलाना अनिवार्य किया गया है। 

ज्यादा किराया वसूलने पर - यदि कोई चालक तय सीमा से अधिक किराया वसूलता है, तो आप इसकी शिकायत स्थानीय आरटीओ (RTO) कार्यालय या यातायात पुलिस हेल्पलाइन नंबर 103 पर कॉल कर सकते हैं।

प्रधान सचिव (परिवहन) एल वेंकटेश्वरलू द्वारा जारी अधिसूचना - मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 67 की उपधारा 1 के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए किराया निर्धारित किया गया था। यह किराया संविदा वाहनों के रूप में संचालित होने वाले ई-रिक्शा पर लागू होता है।

➡️ मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 67 कहती है कि - 

67. सड़क परिवहन को नियंत्रित करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है 

⚫ विवरण स्पष्ट करते हुए, राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) के सचिव सगीर अहमद ने कहा कि नया किराया केवल पूरी यात्रा के लिए बुक किए गए ई-रिक्शा पर लागू होगा, न कि उन पर जो यात्रियों को कई स्थानों पर उतारते और चढ़ाते हैं।

         किराया अधिक वसूलने पर ई-रिक्शा चालक के विरुद्ध जहां स्थानीय RTO कार्यालय या यातायात पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत किए जाने का प्रावधान है वहीं यदि ई-रिक्शा चालक आपसे अभद्रता करता है तब उत्तर प्रदेश में ई-रिक्शा चालक द्वारा अभद्रता (गाली-गलौज या दुर्व्यवहार) करने पर आप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। दोषी पाए जाने पर चालक पर मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत भारी जुर्माना लगाने या उसका परमिट रद्द करने का भी प्रावधान है। 

➡️ ई-रिक्शा चालक द्वारा अभद्रता की स्थिति में अपनाए जाने वाले कानूनी कदम और उपाय:

तत्काल शिकायत: घटना के समय नजदीकी ट्रैफिक पुलिसकर्मी को सूचित करें या तुरंत 112 (UP Police Emergency) नंबर पर कॉल करके पुलिस सहायता बुलाएं।

साक्ष्य जुटाना: अगर मुमकिन हो, तो ई-रिक्शा चालक के दुर्व्यवहार का वीडियो बना लें या ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नंबर/लाइसेंस नंबर अवश्य नोट कर लें।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी (FIR): चालक द्वारा की गई अभद्रता की प्रकृति के अनुसार भारतीय न्याय संहिता की धाराओं (जैसे- धारा 115(2) स्वेच्छा से चोट पहुँचाना, या धारा 352 शांति भंग करने के इरादे से हमला) के तहत पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दें।

परिवहन विभाग से शिकायत: यदि चालक ओवरचार्जिंग (अतिरिक्त किराया वसूली) या मनमानी करता है, तो आप वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग (UP Transport Department) की आधिकारिक वेबसाइट या जनसुनवाई पोर्टल (Jansunwai UP) पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 

राज्य में सड़क सुरक्षा और यात्री उत्पीड़न को रोकने के लिए, पुलिस द्वारा अवैध और बिना पंजीकरण वाले ई-रिक्शा के खिलाफ विशेष अभियान भी चलाए जाते हैं। आप UP Police Citizen Services पोर्टल का उपयोग करके ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की स्थिति भी देख सकते हैं।

           इसलिए परिवहन सुविधा के लिए ई-रिक्शा का प्रयोग करें किन्तु स्वयं सभ्यता के दायरे में रहते हुए अपने सम्मान के साथ समझौता न करें. कानून का पालन खुद भी कीजिए और कानून के दायरे में ई-रिक्शा चालकों को भी रखिए. कानून व्यवस्था सभी के लिए बनाई गई है और इसका पालन सभी के लिए आवश्यक है.

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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